कुपोषण क्या है कई लोग नहीं जानते ।शरीर को अवश्यक संतुलित आहार न मिलने से शरीर कुपोषित हो जाता है । उसको कुपोषण कहते है।महिलायें और बच्चें कुपोषण का शिकार होते है। इसके लक्षण , ठंड ज्यादा लगना, सांस में दिक्कत ,थकान , चिड़चिड़ापन ।ओर शरीर मे बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिससे कई तरह की बीमारियों का शिकार बन जाते है। ओर ठीक होने में भी वक़्त लगता है। आयु के हिसाब से बजन कम हो जाता है। इसलिए कुपोषण की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। ओर आयु के हिसाब से भी कम लंबाई होना भी अल्प कुपोषण । कुपोषण के प्रति सरकार बहुत कोशिशें कर रही है। आ0 बा0 केंद्रों में हर माह बजन लम्बाई ली जा रही । और उसमें तीनों चीजें देखी जा रही कि आयु के हिसाब से बजन कितना है और आयु के हिसाब से लम्बाई कितनी है। लंबाई के हिसाब से बजन कितना है। वृतपर्यवेक्षिका खुद आकर बच्चो का बजन ले रही है।
ओर महिलाओं को बताया भी जा रहा है कि बच्चों को दूध, अंडा, फ्रूट, हरी पत्ते दार सब्जियां ,दाल सबकुछ दें। और बच्चे को खाना दिन में 4 -5 बार खिलाएं। बच्चा अगर माँ का दूध पीता है तो खाना खिलाने के बाद दूध पिलाएं। बच्चों की स्वछता का भी ध्यान रखें।
ओर बच्चों को खेलने दें। बच्चों का ज्यादा कुपोषण का भी कारण है उनको ज्यादा खेलने नही दिया जाता छोटी सी उम्र में पढ़ाई का बोझ डाल दिया जाता। जो उम्र उनके खेलने की होती ,उस उम्र में उनको होम वर्क की टेंशन डाल दी जाती । पहले बच्चे 5-6 साल के स्कूल जाया करते थे। तब खेल कूद मस्ती किया करते थे। और उनकी hight ओर सेहत भी ठीक होती थी। जब बच्चा आठवीं नोवीं में पड़ता था तो ऐसा लगता था कॉलेज में पड़ता होगा। लेकिन आजकल कॉलेज के बच्चों को देखो, तो ऐसा लगता 7-8 में पड़ते होंगे। बच्चो की वो पहले वाली वो ग्रोथ ही नही रही।कारण यहीं है ढाई साल में ही स्कूल डाल देना। अंग्रेज बनने का कॉम्पिटिशन चला है। अंग्रेज बनने का तो पता नही पर इससे बच्चों की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है।।
कुपोषण का कारण बच्चे को मां का दूध न मिलना भी है, कम उम्र में मां बन जाना, ज्ञान का अभाव ,भोजन की कमी, स्वच्छता का अभाव,लड़का लड़की के बीच भेदभाव करना। ऐसे बहुत सारे कुपोषण के कारण है।



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